कुरान की तालीम को जिंदगी का हिस्सा बनाएं : मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी


कैराना, 2 अक्टूबर। दरबार मोहल्ले की ऐतिहासिक दरबार वाली मस्जिद में तकमील-ए-तफ्सीर-ए-कुरान के अवसर पर मगरिब की नमाज के बाद आयोजित जलसे में देश के प्रमुख उलमा ने कुरान की अजमत, तफ्सीर की जरूरत, मदरसों की अहमियत और दीन की तालीम के साथ आधुनिक दौर के चुनौतियों पर रोशनी डाली।

दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि कुरान अल्लाह की आखिरी किताब-ए-हिदायत है। यह केवल तिलावत की किताब नहीं, बल्कि जिंदगी का मुकम्मल दस्तूर है। मुसलमान कुरान को समझकर पढ़ें और उसकी तालीमात को अपनी जिंदगी में उतारें। मस्जिदों में तफ्सीर-ए-कुरान के हल्के आम लोगों को कुरान के मानी और पैगाम समझने का अहम जरिया हैं।

मजाहिर उलूम सहारनपुर के अमीन-ए-आम मुफ्ती मुहम्मद सालेह ने सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए दीन के मसाइल मालूम करने के बढ़ते चलन पर एहतियात बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि AI को मुफ्ती या आलिम का विकल्प नहीं माना जा सकता। दीन के मसाइल में कुरान, हदीस और फिक्ह के उसूलों की गहरी समझ जरूरी है। इसलिए मुसलमानों को अपने दीन से जुड़े मामलों में विश्वसनीय उलमा और मुफ्तियाने किराम से रुजू करना चाहिए।

मुफ्ती सालेह ने युवाओं को सोशल मीडिया के बेजा इस्तेमाल से बचने और गैर-मुसद्दक खबरों को आगे बढ़ाने से पहले जांच करने की नसीहत की।

मुफ्ती इलाही बख्श एकेडमी के डायरेक्टर मौलाना नूरुल हसन राशिद ने कहा कि दीन की सही रहनुमाई के लिए उलमा की जरूरत हमेशा रहेगी। उन्होंने मदरसों को कुरान, हदीस और उलूम-ए-दीनिया की हिफाजत का अहम मरकज बताते हुए अभिभावकों से बच्चों की दुनियावी तालीम के साथ दीनी तर्बियत पर भी ध्यान देने की अपील की।

जलसे में कारी मशकूर गंगोह, मदरसा इशा-अतुल-इस्लाम के मोहतमिम मौलाना बरकतुल्लाह अमीनी, कारी मुहम्मद इमरान बुटराड़ा, मौलाना फैज मुहम्मद, मौलाना मुहम्मद याकूब, मौलाना शमशाद, मौलाना तौहीद हसन, कारी मुहम्मद इरफान शामली और मौलाना मुहम्मद सुफियान मिफ्ताही समेत कई उलमा मौजूद रहे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में मस्जिद के इमाम व खतीब मुफ्ती अब्दुल कुद्दूस और मुतवल्लियों ने अहम भूमिका निभाई। अंत में तकमील-ए-कुरान के मौके पर विशेष दुआ कराई गई। बड़ी संख्या में लोगों ने उलमा के बयानों से इस्तिफादा किया।

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