कैराना कस्बे के ऐतिहासिक इमामबाड़ा कलां में बीसवीं मुहर्रम की रात शोहदाए कर्बला की याद में एक पुरअसर मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया। इसमें उलमा-ए-किराम, ज़ाकिरीन और बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मजलिस की शुरुआत सोज़ व सलाम से हुई। कुर्रतुल ऐन मेहदी, हुसैन हैदर और उनके हमराहों ने सोज़ख़्वानी पेश की, जबकि वसी हैदर साकी और उनके साथियों ने पुरदर्द मर्सिया पढ़कर माहौल को ग़म-ए-कर्बला से भर दिया।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना रईसुल हसन ने अहले बैत (अ.स.) के फ़ज़ाइल बयान किए और वाक़िया-ए-कर्बला की कुर्बानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों की कुर्बानी हमेशा इंसानियत, सच, सब्र और इस्तिकामत की मिसाल बनी रहेगी। उनके बयान को सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं।
इसके बाद गुलज़ार अली ने नौहाख़्वानी की, जबकि अंजुमन फ़ैज़-ए-क़ायम ने पारंपरिक अंदाज़ में सीना-ज़नी कर शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
इस अवसर पर हाजी शाहिद हुसैन, हाजी ज़फ़र अब्बास, जमाल हैदर, हैदर अली, शान हैदर (शानू), मोहम्मद जाफ़र, काज़िम हुसैन, शारी हुसैन, ज़ामिन अली, दानियाल काज़मी, मोहम्मद नूर, मासूम आलम, असद रज़ा, शबाब हैदर, मोहम्मद अली, मोहम्मद माहिर, अरमान हैदर सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे।
मजलिस के समापन पर मौलाना रईसुल हसन ने देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे, एकता और पूरी उम्मत की सलामती के लिए विशेष दुआ कराई।

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