कस्बे के मोहल्ला दरबार खुर्द रेता वाला स्थित मकतब फैज़ुल कुरआन में चार हाफिज़-ए-कुरआन की दस्तारबंदी के मौके पर आयोजित तालीमी, तबलीगी और इस्लाही जलसे को संबोधित करते हुए मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना सैयद अज़हर मदनी(जमीयत उलेमा ए हिंद) ने कहा कि इस्लामी मकतब और मदरसे मुस्लिम समाज की दीनी पहचान और ईमान की हिफाज़त का सबसे मजबूत ज़रिया हैं। इन्हीं इदारों से बच्चों को कुरआन और दीन की बुनियादी तालीम मिलती है। इसलिए हर मुसलमान का फर्ज़ है कि वह इन मकतबों का अखलाकी, माली और तालीमी तौर पर सहयोग करे।
उन्होंने कहा कि आज इस्लामी मदरसे कुछ ताकतों के निशाने पर हैं, क्योंकि यही इदारे कुरआन और सुन्नत की सही तालीम देकर उम्मत को अपनी दीनी पहचान से जोड़े रखते हैं।
मौलाना अज़हर मदनी ने हाफिज़-ए-कुरआन की फज़ीलत बयान करते हुए कहा कि जो शख्स कुरआन याद करे, उसके हलाल को हलाल और हराम को हराम माने तथा उसी पर अमल करे, अल्लाह तआला उसकी जिंदगी से तंगी और परेशानी दूर कर देते हैं। उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि कयामत के दिन हाफिज़-ए-कुरआन की शफाअत उसके दस ऐसे रिश्तेदारों के हक में कबूल की जाएगी जिन पर जहन्नम वाजिब हो चुकी होगी। हाफिज़ के वालिदैन को नूर का ताज पहनाया जाएगा और हाफिज़ को जन्नत में ऊंचे दर्जे अता किए जाएंगे।
सहाबा-ए-कराम के बारे में उन्होंने कहा कि कुरआन और हदीस के मुताबिक तमाम सहाबा उम्मत के लिए रहनुमा हैं। उनकी ज़िंदगी से हमें सही रास्ता मिलता है। जिसने ईमान की हालत में हुज़ूर-ए-अकरम (स०) की ज़ियारत की और उसी ईमान पर दुनिया से गया, वह सहाबी कहलाता है।
इससे पहले मुहम्मद एहसान, मुहम्मद उसामा, मुहम्मद हुज़ैफा और मुहम्मद सुहैल की उलेमा-ए-कराम ने दस्तारबंदी की। मौजूद लोगों ने चारों हाफिज़ों को मुबारकबाद दी और उनके लिए दुआएं कीं।
जलसे के कन्वीनर मौलाना फैज़ मोहम्मद कासमी ने सभी उलेमा, मेहमानों और लोगों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि मकतब फैज़ुल कुरआन का मकसद बच्चों तक कुरआन की तालीम पहुंचाना और नई नस्ल को दीन से जोड़ना है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
इस मौके पर मौलाना शाहनवाज़ मजाहिरी, मौलाना मोहम्मद याकूब, मास्टर समीउल्लाह खान, मुफ़्ती अब्दुल कुद्दूस, मौलाना इमरान रशीदी, मौलवी मोहम्मद सूफियान मिफ्ताही समेत बड़ी संख्या में उलेमा, हाफिज़, तलबा और क्षेत्र के लोग मौजूद रहे।

0 Comments