आज विभागीय निर्देशानुसार भूजल सप्ताह कार्यक्रम के सहायक अध्यापिका रीता चौहान ने बच्चों को समझाया कि पृथ्वी की सतह के नीचे मिट्टी, रेत और चट्टानों के बीच खाली स्थानों और दरारों में मौजूद प्राकृतिक जल को भूजल कहते है । यह मुख्य रूप से बारिश का पानी,बर्फ पिघलने या नदियों का पानी मिट्टी की परतों और चट्टानों के रंध्रों से छनकर नीचे गहराई में चला जाता है और भूमिगत जल-भंडारों में एकत्र हो जाता है । जलस्तर जमीन के अंदर जिस गहराई पर मिट्टी और चट्टानें पूरी तरह से पानी से भर जाती हैं, उस संतृप्त क्षेत्र की ऊपरी सीमा को जलस्तर कहा जाता है । यह मीठा पानी होता है इसे कुओं और नलकूपों के माध्यम से बाहर निकाला जाता है । जो हमारे पीने और सिंचाई आदि के काम आता है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 16 से 22 जुलाई तक 'भूजल सप्ताह' का आयोजन किया जाता है । इसका मुख्य उद्देश्य घटते जल स्तर के प्रति लोगों को जागरूक करना, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देना है । इसीलिए आज प्राथमिक विद्यालय बदलूगढ़ कैराना में बच्चों को समझाया गया कि पीने लायक पानी पृथ्वी पर मात्र करीब 2.5 फीसदी ही है। इसलिए हमें जल को व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए और बरसात का जल संचय करके भविष्य के लिए रखना चाहिए इसीलिए रेनवाटर हार्वेस्टिंग आदि बनाये गये हैं क्योंकि जल है तो कल है। जल ही जीवन का आधार है। इस अवसर पर बच्चों और समस्त जल व्यर्थ न बाहाने की शपथ ली ।

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