या हुसैन या हुसैन की सदाओं से गूंजा कैराना।पांचवीं मोहर्रम पर ऐतिहासिक अलम, जुलजनाह और ताबूत का जुलूस निकला, बड़ी संख्या में शामिल हुए अकीदतमंद।


कैराना। कस्बे के मोहल्ला आल कलां स्थित नवाब रज़ा अली खान के अज़ाखाने से पांचवीं मोहर्रम के अवसर पर हज़रत अली अकबर की याद में ऐतिहासिक अलम, जुलजनाह और शबीह-ए-ताबूत का जुलूस अकीदत और एहतराम के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों और अजादारों ने शिरकत कर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।

जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होता हुआ कैराना-खटीमा मार्ग पर पहुंचा तथा बाद में कर्बला में समाप्त हुआ। वहां आलम-ए-इस्लाम, देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे और इंसानियत की भलाई एवं सलामती के लिए विशेष दुआएं की गईं।

जुलूस की अगुवाई नवाब रज़ा अली खान जुलजनाह की लगाम थामकर कर रहे थे। शामली बस स्टैंड पर पहुंचने पर पुलिस प्रशासन ने यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रैफिक को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट किया तथा भारी वाहनों को बाईपास से गुजारा। जुलूस के आगे और पीछे पुलिस बल लगातार तैनात रहा।

इससे पूर्व नवाब रज़ा अली खान के इमामबाड़े में मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस में हकीम मुदस्सिर जैदी ने अपने हमनवाओं के साथ प्रसिद्ध मर्सिया “लाश-ए-अकबर को जो मकतल से उठा लाए हुसैन” दर्दभरे अंदाज में पेश किया, जिसे सुनकर उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गईं।

मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना इमरान रज़ा गदीरी ने हज़रत अली अकबर की सीरत, फजीलत और कर्बला में उनकी महान कुर्बानी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हज़रत अली अकबर हजरत मोहम्मद साहब के अखलाक, किरदार, बातचीत और व्यक्तित्व की बेहतरीन झलक थे। उनकी शहादत सत्य, वफादारी और इस्लाम की बुलंदी की मिसाल है। उन्होंने युवाओं से हज़रत अली अकबर के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

जुलूस एवं मजलिस में अल्हाज कौसर जैदी, अली हैदर जैदी, वसी हैदर साकी, गुलजार अली, शान हैदर शानू, कुर्रतुल ऐन मेहदी, अली मेहदी, सैयद शहाबुद्दीन हुसैन, फराज अली, सरवर हुसैन, दानिश रज़ा, फैसल रज़ा, अख्तर हुसैन, डॉ. फरहत, अख्तर अब्बास, शहजाद रज़ा, असफ अली, रज़ी हैदर, अली अहमद, अली गौहर, अली मियां, काजिम हुसैन, शाहिद हुसैन, ज़ामिन अली, हाजी शाहिद हुसैन, हाजी जाफर अब्बास, शबाब हैदर, मोहम्मद अली, मुमताज अली, मोहम्मद आलम, अरबाब हैदर तथा शाह रज़ा जैदी सोनू सदस्य सहित सैकड़ों अकीदतमंद मौजूद रहे।

जुलूस मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर मोहिब्बान-ए-अली की ओर से सबीलें लगाई गईं, जहां राहगीरों और जुलूस में शामिल लोगों को शरबत पिलाया गया।

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