मुसलमान गुनाहों और नैतिक पतन से बचें:


 मौलाना मोहम्मद गुलज़ार कासमी का प्रभावी बयान, रूहानी महफ़िल आयोजित

कैराना, 4 मई
स्थानीय ईदगाह के पास, चाँद मस्जिद से सटे हाजी अज़ीम फ़रीदी के निवास पर एक रूहानी महफ़िल का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के उलेमा-ए-किराम, इमामों और गणमान्य नागरिकों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। इस अवसर पर मौलाना मोहम्मद गुलज़ार कासमी (खलीफ़ा-ए-अजल सिराजुल मिल्लत मौलाना बिलाल थानवी) बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे और तसव्वुफ़ व शरीअत के विषय पर प्रभावी तक़रीर पेश की।

अपने बयान में मौलाना मोहम्मद गुलज़ार कासमी ने कहा कि शरीअत इंसान की ज़ाहिरी ज़िंदगी को संवारती है, जबकि तसव्वुफ़ उसके बातिनी पहलू की इस्लाह का ज़रिया है। उन्होंने कहा कि जब तक इन दोनों का सही तालमेल न हो, इंसान मुकम्मल नहीं बन सकता। मौजूदा दौर में फैल रही बुराइयों पर चिंता जताते हुए उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे गुनाहों और नैतिक पतन से बचें, तक़वा और परहेज़गारी को अपनाएं तथा अपने किरदार और अमल को इस्लामी तालीमात के मुताबिक ढालें। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की इस्लाह व्यक्ति की इस्लाह से ही संभव है।

महफ़िल में कैराना जामा मस्जिद के खतीब व इमाम मौलाना मोहम्मद ताहिर, इदारा-ए-इशाअतुल इस्लाम के मोहतमिम बरकतुल्लाह अमीनी, क़ारी सैयद मोहम्मद आज़म कासमी मुज़फ्फरनगर, मुफ़्ती अब्दुल कुद्दूस (इमाम मस्जिद दरबार), हाफ़िज़ शबीर कांधला, मौलाना मोहम्मद उमर, मौलाना याक़ूब, मुफ़्ती हुसैन, मुफ़्ती फरहान शम्सी, मौलाना मंशाद, हाफ़िज़ जमशेद, हाफ़िज़ नूर मोहम्मद झिंझाना, क़ारी शाद, दिलशाद उर्फ़ सदा, वसीम फ़रीदी, आरिफ़ अलवी, डॉ अजमतुल्ला खान ,फारूक़ आज़म फ़रीदी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

महफ़िल के समापन पर मौलाना मोहम्मद गुलज़ार कासमी ने रुक़अत भरी दुआ कराई, जिसमें उम्मत-ए-मुस्लिमाह की भलाई, मुल्क की अमन-ओ-सलामती और गुनाहों से निजात की ख़ास दुआ की गई। रूहानी माहौल में आयोजित यह महफ़िल उपस्थित लोगों के दिलों पर गहरा असर छोड़ गई।

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