शहर की ईदगाह और जामा मस्जिद समेत एक दर्जन से अधिक स्थानों (मस्जिदों) पर ईद-उल-फितर की नमाज़ 21 मार्च 2026, 1 शव्वाल 1447 हिजरी शनिवार को अदा की जाएगी। शासन के निर्देशों के अनुसार ईदगाह और मस्जिदों के बाहर सड़कों पर नमाज़ अदा न करने की अपील की गई है, जिसे लेकर शहर में चर्चा तेज़ हो गई है।
ईदगाह का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है, जहां शहर की बढ़ती आबादी के मुकाबले जगह कम होने की बात सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि सीमित स्थान के कारण हर साल परेशानी होती है, ऐसे में सड़क पर नमाज़ न पढ़ने की अपील ने नई चिंता खड़ी कर दी है।
जामा मस्जिद प्रबंधन की ओर से भी अपील की गई है कि ईद की नमाज़ मस्जिदों और ईदगाह के अंदर ही अदा की जाए। वहीं, सोशल मीडिया पर विधायक की अपील के बाद लोगों ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों ने ईदगाह के पास खाली पड़ी जमीन को नमाज़ के लिए इस्तेमाल करने की मांग भी उठाई है।
कोतवाली में आयोजित शांति समिति की बैठक में भी शहर की मस्जिदों के जिम्मेदारों और इमामों ने आपसी सौहार्द और व्यवस्था बनाए रखते हुए नमाज़ निर्धारित परिसरों के अंदर ही अदा करने पर जोर दिया।
मदरसा के मोहतमिम(प्रबंध संचालक) मौलाना बरकतुल्ला अमीनी ने अपील की है कि ईद-उल-फितर की नमाज़ मदरसे के अंदरूनी परिसर में अदा की जाएगी, इसलिए नमाज़ के लिए आने वाले लोग अपनी बाइक या चार पहिया वाहन मदरसे के गेट से हटकर सड़क किनारे इस तरह पार्क करें कि आवागमन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

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