कैराना, 20 मार्च। रमज़ान के आखिरी जुमे के मौके पर जामा मस्जिद और मदरसा इशाअतुल इस्लाम समेत शहर की दो दर्जन से अधिक मस्जिदों में नमाज़ -ए- जुमा अदा की गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मस्जिदों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा।
जामा मस्जिद में तकरीर करते हुए मौलाना मोहम्मद ताहिर ने ईद-उल-फितर की फजीलत और बरकतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ईद-उल-फितर रोजेदारों के लिए अल्लाह का इनाम है, इसलिए इस दिन आपसी भाईचारा, मोहब्बत और जरूरतमंदों की मदद को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने जकात और सदका-ए-फित्रा की अहमियत बताते हुए कहा कि हर साहिब-ए-निसाब मुसलमान पर इसकी अदायगी जरूरी है, ताकि गरीब तबका भी ईद की खुशियों में शामिल हो सके।
वहीं मदरसा इशाअतुल इस्लाम में अपने बयान में मौलाना बरकत उल्लाह अमीनी ने कहा कि ईद-उल-फितर का पैगाम एकता, भाईचारा और इंसानियत है। उन्होंने जकात और फित्रा की अहमियत बताते हुए कहा कि इससे माल पाक होता है और समाज में बराबरी का भाव पैदा होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ईद के मौके पर शांति और सौहार्द बनाए रखें।
अंत में उलेमा ने संयुक्त रूप से लोगों से ईद-उल-फितर के अवसर पर अमन-चैन कायम रखने और आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की।

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