हज़रत इमाम मेहदी (हज्जत बिन हसन अस्करी) की विलादत-ए-बासआदत के अवसर पर कैराना स्थित इमामबाड़ा में “जश्न-ए-नूर” के शीर्षक से एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिया समुदाय के बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर इमाम-ए-ज़माना के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
इस अवसर पर प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना रईसुल हसन ने इमाम मेहदी की सीरत और उनके ज़ुहूर से जुड़ी मान्यताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिया मत के अनुसार इमाम मेहदी अल्लाह की जीवित हुज्जत हैं, जो पर्दा-ए-ग़ैबत में हैं और अल्लाह के हुक्म से एक निश्चित समय पर ज़ुहूर फरमाकर दुनिया को ज़ुल्म व नाइंसाफ़ी से मुक्त करेंगे। मौलाना ने कहा कि इमाम का इंतज़ार केवल शब्दों तक सीमित नहीं, बल्कि सब्र, तक़वा और इंसाफ़ के रास्ते पर चलने का नाम है।
कार्यक्रम के दौरान एक कवि सम्मेलन भी आयोजित किया गया, जिसमें वसी हैदर साक़ी, सरवर हुसैन, क़ुर्रतुलऐन मेहदी, ताबिश ज़ैदी और मोहम्मद अफ़ज़ल सहित कई शायरों ने इमाम मेहदी की शान में अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। शायरों के कलाम को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के अंत में इमाम मेहदी के ज़ुहूर में जल्द़ी, देश-दुनिया में अमन-चैन और मानवता की भलाई के लिए विशेष दुआएं की गईं। इसके बाद उपस्थित लोगों में तबर्रुक वितरित किया गया।

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