गांव राणा माजरा में तीन दिवसीय तब्लीगी इज्तिमा का समापन, लाखों लोगों ने की शिरकत


मौलाना मुहम्मद साद कंधलवी ने नमाज की अहमियत, इक़ामत-ए-सलात और दीनी जिम्मेदारियों पर किया विचारोत्तेजक खिताब, स्वयंसेवकों की सेवाओं को सराहा

पानीपत, 2 नवंबर हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित गांव राणा माजरा में आयोजित तीन दिवसीय विशाल तब्लीगी इज्तिमा आज अमन-ओ-आफियत की रूह परवर दुआ के साथ संपन्न हो गया। इज्तिमा में देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों की तादाद में फरजंदान-ए-तौहीद ने शिरकत की। तीन दिनों तक चले इस इज्तिमा में अमीर-ए-तब्लीग मौलाना मुहम्मद साद कंधलवी के कई अहम खिताब हुए, जिनमें खास तौर पर नमाज की अहमियत, इक़ामत-ए-सलात, दीनी जिम्मेदारियों और इस्लाह-ए-मआशरा पर जोर दिया गया।

इज्तिमा की आखिरी निशस्त को खिताब करते हुए मौलाना मुहम्मद साद कंधलवी ने कहा कि दीनी इज्तिमा दरअसल इंसान की तामीर और समाज की इस्लाह के मरकज होते हैं। इनकी हैसियत दुनियावी मेलों और मनोरंजन के कार्यक्रमों जैसी नहीं होती, बल्कि इनका बुनियादी मकसद इंसानों के दिलों और दिमाग में दीन की फिक्र पैदा करना और उनकी जिंदगी को इस्लामी शरीयत के मुताबिक ढालना है।

उन्होंने मुसलमानों में नमाज के प्रति बढ़ती लापरवाही पर अफसोस जताते हुए कहा कि आज बड़ी तादाद में मुसलमान पांच वक्त की नमाज के मामले में कोताही बरत रहे हैं, जबकि नमाज इस्लाम का दूसरा बुनियादी रुक्न और बंदे का अपने रब से रिश्ता मजबूत करने का सबसे अहम जरिया है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बिअसत के अहम मकासिद में अल्लाह के दीन को कायम करना और उम्मत को इबादत की पाबंदी की तालीम देना भी शामिल है।

मौलाना मुहम्मद साद कंधलवी ने इक़ामत-ए-सलात की वजाहत करते हुए कहा कि किसी इबादत को कायम करने का मतलब सिर्फ कभी-कभार उसे अदा करना नहीं, बल्कि उसमें हमेशा पाबंदी और निरंतरता बरतना है। नमाज ऐसी इबादत है, जिसे हर मुसलमान को अपनी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खैरुल कुरून और उसके बाद के दौर में नमाज की पाबंदी को असाधारण अहमियत हासिल थी और नमाज छोड़ने को बेहद गंभीर कोताही समझा जाता था।

तब्लीगी जमात के निजाम-ए-दावत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जमात में खुसूसी गश्त का नियमित एहतिमाम किया जाता है। इसके जरिए लोगों से व्यक्तिगत मुलाकात कर उन्हें नमाज और दीनी फराइज की ओर मुतवज्जह किया जाता है। उन्होंने जमात के जिम्मेदारों और अमीरों को हिदायत दी कि खुसूसी गश्त के इस निजाम को और अधिक प्रभावी तथा व्यापक बनाया जाए, ताकि समाज का कोई भी व्यक्ति नमाज की पाबंदी से महरूम न रहे और पूरी उम्मत में इक़ामत-ए-सलात का माहौल कायम हो।

मौलाना ने मोबाइल फोन और तस्वीरें खींचने के संबंध में भी विस्तार से बातचीत की। उन्होंने मौजूदा दौर को फितनों का दौर बताते हुए कहा कि ऐसे हालात में हर मामले में एहतियात बरतना और दीनी हदों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। मुसलमानों को चाहिए कि वे अपने रहन-सहन और रोजमर्रा के मामलात में शरीयत की तालीमात को सामने रखें तथा गैर जरूरी मशगूलियतों से बचें।

इज्तिमा के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और खानकाह बोडिया के सज्जादानशीन अलहाज पीर जी हाफिज हुसैन अहमद कादरी मुजद्दिदी ने रात के समय अमीर-ए-तब्लीग मौलाना मुहम्मद साद कंधलवी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों शख्सियतों के बीच हरियाणा के मौजूदा हालात और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

इज्तिमा के कामयाब आयोजन में स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की भूमिका भी बेहद अहम रही। आसपास के हजारों ग्रामीणों ने स्वेच्छा से अपनी सेवाएं दीं और इंतजामात में भरपूर सहयोग किया। इज्तिमा स्थल के आसपास विभिन्न स्थानों पर स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। जायरीन और प्रतिभागियों की सहूलियत तथा व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।

शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा, लेकिन स्थानीय लोगों के सहयोग और बेहतर इंतजामी व्यवस्था के चलते पुलिस को ज्यादा हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं पड़ी।

गौरतलब है कि इस विशाल इज्तिमा की तैयारियां कई महीने पहले से चल रही थीं। पड़ोसी जिला शामली के कस्बा कैराना और आसपास के गांवों से भी हजारों लोगों ने इज्तिमा में शिरकत कर दीनी और तब्लीगी गतिविधियों में हिस्सा लिया। तीन दिवसीय इज्तिमा के शांतिपूर्ण समापन पर आयोजकों ने तमाम स्वयंसेवकों, स्थानीय निवासियों और सहयोग करने वाले लोगों का शुक्रिया अदा किया।

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