सर सैयद अहमद खाँ के शैक्षिक और साहित्यिक मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प, साहित्यिक व सामाजिक संगठनों ने पेश की श्रद्धांजलि


शिक्षा, समाज सुधार, उर्दू का प्रचार-प्रसार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना सर सैयद अहमद खाँ के मिशन का मुख्य उद्देश्य था: साहित्यकार

कैराना, 17 अक्टूबर
उर्दू के महान सेवक, शिक्षाविद् और समाज सुधारक सर सैयद अहमद खाँ की शैक्षिक, साहित्यिक और सामाजिक सेवाओं को याद करते हुए नगर की विभिन्न साहित्यिक, सामाजिक एवं पत्रकार संगठनों के पदाधिकारियों ने उनके विचारों और मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस दौरान साहित्यिक हस्तियों ने कहा कि सर सैयद अहमद खाँ के विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। उनका जीवन शिक्षा, जागरूकता, बौद्धिक विकास, सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक चेतना का संदेश देता है।

अंजुमन फरोग-ए-उर्दू अदब के उपाध्यक्ष शाह रज़ा एडवोकेट, अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू अदब के अध्यक्ष शेर खान साहिल, अंजुमन गुलिस्तान-ए-उर्दू अदब के अध्यक्ष डॉ. आरिफ कमर खान, अंजुमन बज्म-ए-उर्दू अदब के अध्यक्ष सैयद अनीस जिगर और अंजुमन चराग-ए-इल्म व अदब के अध्यक्ष फिरोज खान ने सर सैयद अहमद खाँ की शैक्षिक एवं साहित्यिक सेवाओं को याद करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे दौर में ज्ञान और शिक्षा की अलख जगाई, जब भारतीय समाज अनेक शैक्षिक और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा था। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प और सुधारवादी विचारधारा के माध्यम से समाज को शिक्षा का महत्व समझाया तथा आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

अंजुमन फरोग-ए-उर्दू अदब के उपाध्यक्ष शाह रज़ा एडवोकेट ने सर सैयद अहमद खाँ की सेवाओं को याद करते हुए कहा कि उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार, बौद्धिक चर्चाओं को बढ़ावा देने तथा समाज में सकारात्मक विचारधारा विकसित करने के लिए सर सैयद का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि उर्दू केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान, साहित्यिक विरासत और बौद्धिक पूंजी भी है।

उन्होंने कहा कि साहित्यकारों और साहित्यिक संगठनों की जिम्मेदारी है कि वे उर्दू के प्रचार-प्रसार के साथ नई पीढ़ी में किताबें पढ़ने की रुचि पैदा करें तथा साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा दें। सर सैयद के मिशन से सच्चा जुड़ाव तभी संभव है, जब ज्ञान और साहित्य को समाज सुधार तथा वैचारिक विकास का माध्यम बनाया जाए।

अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू अदब के अध्यक्ष शेर खान साहिल ने कहा कि सर सैयद अहमद खाँ ने शिक्षा को राष्ट्रीय विकास और सामाजिक उन्नति की कुंजी माना। उनकी विचारधारा का मुख्य उद्देश्य समाज को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान, शोध और आधुनिक शिक्षा की रोशनी की ओर ले जाना था।

उन्होंने कहा कि आज भी शैक्षिक जागरूकता, शोध, साहित्यिक रुचि और सकारात्मक विचारों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है। यदि नई पीढ़ी को सर सैयद के विचारों से परिचित कराया जाए तथा उसमें अध्ययन, शोध और ज्ञान प्राप्त करने का शौक पैदा किया जाए, तो समाज में सकारात्मक बदलाव की राह आसान हो सकती है।

उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू अदब उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार तथा साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अपना प्रयास जारी रखेगी।

अंजुमन गुलिस्तान-ए-उर्दू अदब के अध्यक्ष डॉ. आरिफ कमर खान ने सर सैयद अहमद खाँ की सुधारवादी सोच की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने ज्ञान को मानव विकास, सांस्कृतिक उन्नति और सामाजिक सुधार का प्रमुख माध्यम माना।

उन्होंने कहा कि सर सैयद ने समाज को अतीत की गौरवशाली विरासत से परिचित कराने के साथ भविष्य की जरूरतों को समझने और बदलते समय के अनुरूप अपनी बौद्धिक एवं शैक्षिक क्षमताओं को विकसित करने का संदेश दिया। उनके विचार में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि इंसान में जागरूकता, विवेक, नैतिक जिम्मेदारी और समस्याओं को समझने की क्षमता विकसित करना भी है।

उन्होंने कहा कि साहित्यिक संगठनों को मुशायरों और साहित्यिक बैठकों के साथ शैक्षिक कार्यक्रमों, विचार-विमर्श और समाज सुधार से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा देना चाहिए, ताकि सर सैयद का संदेश नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

अंजुमन बज्म-ए-उर्दू अदब के अध्यक्ष सैयद अनीस जिगर ने कहा कि सर सैयद अहमद खाँ के आंदोलन ने भारतीय मुसलमानों में आधुनिक शिक्षा और बौद्धिक विकास के लिए नए रास्ते खोले। उन्होंने साहित्य को केवल कल्पना और शब्दों की सजावट तक सीमित रखने के बजाय उसे सामाजिक चेतना, सुधार और वैचारिक जागरूकता से जोड़ने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि सर सैयद की साहित्यिक और सुधारवादी कोशिशों ने उर्दू गद्य को नई शैली, उद्देश्यपूर्ण अभिव्यक्ति और तर्कपूर्ण विचारों से समृद्ध किया। आज भी उर्दू साहित्य को सामाजिक समस्याओं को सामने लाने, नई पीढ़ी की वैचारिक तरबियत और सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने के प्रभावी माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सर सैयद के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है कि ज्ञान और साहित्य को व्यावहारिक जीवन से जोड़ा जाए तथा समाज में संवाद, सहिष्णुता और गंभीर अध्ययन की परंपरा को मजबूत किया जाए।

अंजुमन चराग-ए-इल्म व अदब के अध्यक्ष फिरोज खान ने कहा कि सर सैयद अहमद खाँ का पूरा जीवन शिक्षा के प्रति समर्पण, दृढ़ इच्छाशक्ति, समाज सुधार और सामाजिक जागरूकता की मिसाल है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा के प्रचार-प्रसार को अपना उद्देश्य बनाया और समाज को यह संदेश दिया कि तरक्की तथा खुशहाली का रास्ता ज्ञान, शोध, मेहनत और बौद्धिक विकास से होकर गुजरता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सर सैयद के विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। आज समाज को शैक्षिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक सद्भाव की विशेष जरूरत है। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि अंजुमन चराग-ए-इल्म व अदब ज्ञान और साहित्य की रोशनी फैलाने तथा सर सैयद के सुधारवादी संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।

सर सैयद अहमद खाँ के सुधारवादी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पहलू शिक्षा को समय की जरूरतों के अनुरूप बनाना, आधुनिक ज्ञान-विज्ञान से लाभ उठाना और समाज में तर्कपूर्ण तथा शोधपरक सोच विकसित करना था। अलीगढ़ आंदोलन के माध्यम से उन्होंने शैक्षिक जागरूकता की जो नींव रखी, उसने भारतीय उपमहाद्वीप में आधुनिक मुस्लिम शैक्षिक विचारधारा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी लेखन, साहित्यिक और पत्रकारिता संबंधी सेवाओं ने भी उर्दू गद्य को तर्क, उद्देश्यपूर्ण अभिव्यक्ति और समाज सुधार के विचारों से समृद्ध किया। उनके विचारों ने शिक्षा को सामाजिक विकास और सामुदायिक प्रगति से जोड़ने की प्रेरणा दी।

साहित्यिक और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि सर सैयद अहमद खाँ को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है, जब उनके विचारों को केवल समारोहों और औपचारिक बयानों तक सीमित न रखकर वास्तविक जीवन में अपनाया जाए।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में शिक्षा के प्रति लगाव, किताबों से जुड़ाव, शोध की रुचि, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना बेहद जरूरी है। इसके लिए साहित्यिक एवं सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा।

अंत में सभी पदाधिकारियों ने संकल्प दोहराया कि नगर की साहित्यिक और सामाजिक संस्थाएं उर्दू भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार, शैक्षिक जागरूकता तथा सर सैयद अहमद खाँ के सुधारवादी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए आपसी सहयोग से प्रयास जारी रखेंगी, ताकि ज्ञान और विचारों की यह रोशनी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी मार्गदर्शन का स्रोत बनी रहे

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