कैराना शहर की घनी आबादी के बीच चल रहा मीम एग्रो मीट प्लांट अब लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्लांट के चारों तरफ फैली गंदगी, बदबू और खून-पानी से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर रिहायशी इलाके के बीच में ये मीट फैक्ट्री कैसे चल रही है?
स्थानीय निवासियों का कहना है कि मीट प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी और कचरा खुलेआम नालियों में बहाया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में भयंकर बदबू फैली रहती है। मक्खी-मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है और बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
सबसे गंभीर आरोप ये है कि प्लांट में छोटे और बीमार पशुओं का कटान होने की चर्चा जोरों पर है। लोगों का कहना है कि अगर बीमार पशुओं का मीट बाजार में जा रहा है तो ये सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। ऐसी चर्चा से लोगों में भारी आक्रोश है।
नियमों के अनुसार मीट प्लांट को आबादी से दूर, सभी मानकों को पूरा करके चलाना होता है, लेकिन यहां सब कुछ इसके उलट हो रहा है। घनी आबादी के बीच प्लांट चलने से पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य दोनों पर बुरा असर पड़ रहा है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस प्लांट की तुरंत जांच कराई जाए।
लोगों ने जिलाधिकारी शामली और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मांग की है कि मौके पर टीम भेजकर जांच करे और अगर नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो प्लांट को तुरंत बंद किया जाए। लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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