कैराना। श्रीमद भागवत कथा के छटे दिन महाराज ने बताया की करते सब कुछ भगवान ही है लेकिन वह दिखाते नहीं, ओर मनुष्य करता कुछ नहीं ओर दिखाने मे सबसे आगे रहता है। सुबह साढ़े तीन बजे से पहले स्नान नहीं करना चाहिए। भगवान ओर मौत को सदा याद रखना चाहिए, भगवान कि भक्ति करने से मनुष्य का अंत्यकर्ण शुद्ध हो जाता है। जिनके मन मे अभिमान है उन्हें भगवान कि प्राप्ति नहीं हो सकती है। अभिमान नष्ट हुआ ओर भगवान कि प्राप्ति हुई।
शनिवार को क्षेत्र के ऊंचागांव मे स्थित मानव चेतना केंद्र आश्रम मे चल रही श्रीमद भागवत कथा के छटे दिन स्वामी विशुद्धानन्द महाराज के परम् शिष्य स्वामी ब्रह्म स्वरूपानंद महाराज ने अपनी अमृत वाणी करते हुवे बताया कि जो मनुष्य अच्छा कार्य करता है ओर भगवान का गुणगान करता है भगवान भी ऐसे मनुष्य से मिलना चाहते है। जिस मनुष्य के अंदर अभिमान होता है उन्हें परमात्मा कि प्राप्ति नहीं होती। महाराज ने बताया कि भगवान ओर संत के सामने अभिमान नहीं चलता, जो सबको साथ लेकर चलता है वो सदा आगे बढ़ता है लेकिन जो मनुष्य खुद का भला चाहता है वह कभी आगे नही बढ़ सकता। किसी भी मनुष्य के ज्यादा नजदीक नहीं रहना चाहिए, ज्यादा साथ रहने से मनुष्य के गुण नहीं अवगुण दिखने शुरू हो जाते है इस लिए किसी के साथ ज्यादा घुट मिलकर नहीं रहना चाहिए।
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इंसैट
जिसका कोई गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं
महाराज बताया कि भगवान सर्व व्यापी है कण-कण मे उनका वाश है, भगवान को खोजा नहीं जाता उन्हें तो प्यार ओर भाव से महसूस किया जाता है, जो मनुष्य भगवान से प्यार करते है ओर उन्हें महसूस करते है उन्हें भगवान कि सदा प्राप्ति होती है।
भगवान को प्राप्त करने के लिए धन-गाडी बंगले कि जरूरत नहीं है, भगवान को प्राप्त करने का केवल एक ही रास्ता है, भगवान का भजन कीजिये ओर सच्ची श्रद्धा से उनका मन्न कीजिये, इससे ही भगवान कि प्राप्ति हो जाएगी। मनुष्य को जब जब अभिमान आता है उन्हें गुरु जी कि शरण मे चला जाना चाहिए, संत कि शरण मे जाने से मनुष्य का अहंकार चूर चूर हो जाता है। इस दौरान कथा मे सुन्दर भजन भी पेश किये गए, इस दौरान कथा मे गांव व बाहर से आये भारी संख्या में श्रद्धालुगण मौजूद रहे।

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