भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में तैनात बाबरी गांव के जवान अजय कुमार (36) के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। बृहस्पतिवार शाम उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। आईटीबीपी के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने साथी को अंतिम सलामी दी, जबकि उनके भतीजे आदित्य ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी ने माहौल को गमगीन बना दिया।
बड़े भाई महेश कुमार ने बताया कि अजय कुमार वर्ष 2009 में आईटीबीपी में भर्ती हुए थे और वर्तमान में उत्तराखंड के चमोली जिले के गौचर क्षेत्र में तैनात थे। करीब एक माह पहले वह अवकाश पर घर आए थे। छुट्टी समाप्त होने के बाद ड्यूटी पर लौटते समय हरिद्वार में अचानक उन्हें फालिज का अटैक पड़ा। तबीयत बिगड़ने पर वह टैक्सी से वापस घर लौट आए, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें शामली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से चिकित्सकों ने उन्हें मेरठ रेफर कर दिया। हालत में सुधार नहीं होने पर उन्हें नोएडा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बुधवार दोपहर लगभग 3:00 बजे उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
अजय कुमार का विवाह वर्ष 2015 में रेशमा के साथ हुआ था। उनकी कोई संतान नहीं थी। परिवार में माता प्रेमो देवी, बड़े भाई महेश कुमार, एक छोटे भाई और तीन विवाहित बहनें हैं। जवान के निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में शोक का माहौल बना रहा।
अंतिम संस्कार के दौरान सहायक कमांडेंट अमरपाल सिंह के नेतृत्व में आईटीबीपी के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम सलामी दी। एसआई (जीडी) महेश चंद और एएसआई जसबीर सिंह सहित अन्य जवान भी मौजूद रहे। उपजिलाधिकारी निधि भारद्वाज और तहसीलदार मनोज कुमार ने पुष्पचक्र अर्पित कर दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद आईटीबीपी अधिकारियों ने बड़े भाई महेश कुमार को राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) और अंतिम संस्कार सहायता राशि सौंपते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बाबरी थाने से उपनिरीक्षक राजेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। पूरे गांव ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

0 Comments