सातवीं मोहर्रम के मौके पर कस्बे के मोहल्ला अंसारियान स्थित छोटे इमामबाड़े से हज़रत अली अकबर की शबीहे-ताबूत तथा हज़रत अब्बास के अलम का जुलूस अकीदत, एहतराम और धार्मिक उत्साह के साथ निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत की और पूरा माहौल कर्बला की याद तथा इमाम हुसैन की शहादत के ग़म में डूबा नजर आया।
जुलूस के दौरान प्रसिद्ध नौहाख्वां वसी हैदर साकी और उनके साथियों ने दर्दभरे नौहे पेश किए। इस दौरान अज़ादारों ने मातम और सीना-ज़नी कर शहीदाने-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। नौहों और मातम की सदाओं से वातावरण गमगीन हो गया तथा श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं।
ताज़िया और अलम अपने निर्धारित मार्गों से होते हुए इमामबाड़ा कलां स्थित हज़रत अली अकबर की शबीहे-ताबूत के स्थान पर पहुंचकर सम्पन्न हुआ। वहां मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया, जिसमें सोज़ और सलाम के माध्यम से अहलेबैत की महान कुर्बानियों को याद किया गया।
इससे पूर्व शहज़ाद रज़ा, मुनव्वर हुसैन, सफदर हुसैन तथा अली मियां के अज़ाखानों से भी अलमों के जुलूस निकाले गए, जो मुख्य जुलूस में शामिल हुए।
बाद में हज़रत अली, इमाम हुसैन और हज़रत अब्बास अलमदार के ईसाले-सवाब की नीयत से विभिन्न स्थानों पर अज़ादारों एवं जुलूस में शामिल लोगों के लिए शर्बत, तबर्रुक और नियाज़ का वितरण किया गया। श्रद्धालुओं ने अहलेबैत के प्रति अपनी मोहब्बत और अकीदत का इज़हार करते हुए देश और समाज में अमन-चैन की दुआ की।
इस अवसर पर मौलाना इमरान काज़मी ने कहा कि सातवीं मोहर्रम हज़रत अबुल फ़ज़्ल अब्बास की वफ़ादारी, त्याग और अलमदारी की याद दिलाती है। उन्होंने कहा कि कर्बला का वाकया इंसानियत, सत्य के समर्थन और अत्याचार के विरुद्ध डटे रहने की प्रेरणा देता है। अहलेबैत की शिक्षाओं को अपनाकर समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मोहर्रम का पैगाम सब्र, कुर्बानी और सत्य के लिए हर कठिनाई को सहन करने की सीख देता है।
जुलूस में अलहाज कौसर ज़ैदी, अली हैदर ज़ैदी, वसी हैदर साकी, गुलज़ार अली, शान हैदर शानू, कुर्रतुल ऐन मेहदी, अली मेहदी, सैयद शहाबुद्दीन हुसैन, फ़राज़ अली, सरवर हुसैन, दानिश रज़ा, फ़ैसल रज़ा, अख्तर हुसैन, डॉ. फ़रहत, अख्तर अब्बास, शहज़ाद रज़ा, आसिफ अली, रज़ी हैदर, अली अहमद, अली गौहर, अली मियां, काज़िम हुसैन, शाहिद हुसैन, ज़ामिन अली, हाजी शाहिद हुसैन, हाजी जाफर अब्बास, शबाब हैदर, मोहम्मद अली, मुमताज़ अली, मोहम्मद आलम, अरबाब हैदर तथा शाह रज़ा ज़ैदी सोनू सदस्य सहित सैकड़ों अज़ादार और अहलेबैत के चाहने वाले मौजूद रहे।

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