रमज़ान के पहले जुमे पर मस्जिदों में उमड़ा सैलाब, रोज़ा-इबादत के फ़ज़ाइल पर हुए प्रभावी बयान


कैराना, 20 फरवरी। रमज़ान उल मुबारक के पहले जुमे के मौके पर नगर व आसपास के क्षेत्रों की मस्जिदों में रूहानी माहौल देखने को मिला। बड़ी तादाद में मुसलमानों ने मस्जिदों में पहुंचकर जुमे की नमाज़ अदा की। इस दौरान ज़रूरतमंदों में ज़कात, सदक़ात और अन्य मदद भी बांटी गई। संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र पुलिस बल तैनात रहा।

नगर की प्रमुख इबादतगाह जामा मस्जिद कैराना में जुमे का ख़ुत्बा मौलाना ताहिर ने दिया और नमाज़ की इमामत कराई। वहीं मदरसा अशाअतुल इस्लाम में मौलाना बरकतुल्लाह अमीनी ने नमाज़ अदा कराते हुए रमज़ान की फ़ज़ीलत पर विस्तार से बयान दिया।

मौलाना बरकतुल्लाह अमीनी ने कहा कि रमज़ान दरअसल तक़वा, आत्ममंथन और आत्मशुद्धि का महीना है। रोज़ा इंसान को सब्र, सहनशीलता और अल्लाह की इताअत की बुलंद सिफ़ात से सजाता है। उन्होंने कहा कि बिना वाजिब वजह रोज़ा न रखने वाले घाटे में रहते हैं, जबकि रोज़ेदार और नमाज़ के पाबंद लोगों को दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतर अज्र मिलता है।

मौलाना ताहिर ने अपने संक्षिप्त बयान में नमाज़ -ए- तरावीह की अहमियत बताते हुए कहा कि तरावीह रमज़ान की रूह है, जो इंसान को क़ुरआन से जोड़ती है और ईमान में ताज़गी पैदा करती है। उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे नियमित रूप से तरावीह का एहतमाम करें ताकि इस मुक़द्दस महीने की बरकतों से पूरा फ़ायदा हासिल हो सके।

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