रमज़ान के दूसरे जुमे के मौके पर शहर की मस्जिदों में अकीदत और रूहानियत का माहौल देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने जुमे की नमाज़ अदा की। जामा मस्जिद, मदरसा इशाअतुल इस्लाम, शामली बस अड्डा मस्जिद और मदीना मस्जिद में क्रमशः मौलाना मोहम्मद ताहिर, क़ारी मोहम्मद साजिद खान, क़ारी अनीस अहमद और मौलाना हबीबुल्लाह मदनी ने नमाज़ की इमामत कराई।
मौलाना मोहम्मद ताहिर ने रोज़े की फ़ज़ीलत बयान करते हुए कहा कि रोज़ा इंसान की आत्मिक शुद्धि का सर्वोत्तम साधन है, जो मनुष्य के भीतर संयम, धैर्य और कृतज्ञता की भावना को मज़बूत करता है। उन्होंने कहा कि रोज़ा इंसान को अपने व्यवहार और चरित्र को सुधारने की प्रेरणा देता है और यही एक आदर्श जीवन की आधारशिला है।
इसके बाद मौलाना हबीबुल्लाह मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि रमज़ान रहमत और मग़फ़िरत का महीना है, जिसमें इंसान अपने ईश्वर के क़रीब होकर जीवन को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि रोज़ा केवल भूख-प्यास सहने का नाम नहीं, बल्कि यह इंसान के भीतर तक़वा, सब्र और ज़िम्मेदारी की भावना पैदा करता है। उन्होंने रमज़ान के तीनों अशरों का महत्व बताते हुए कहा कि पहला अशरा रहमत, दूसरा मग़फ़िरत और तीसरा मुक्ति का होता है, इसलिए हर व्यक्ति को इस पवित्र महीने की क़दर करते हुए अपने आचरण को भी सुधारना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रमज़ान हमदर्दी, त्याग और सामाजिक सद्भाव का संदेश देता है, जो एक अच्छे समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नमाज़ जम के बाद इमाम ने देश में शांति, भाईचारे और मानवता की भलाई के लिए विशेष प्रार्थना की गई। इस मौके पर जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे।

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