कैराना।
कस्बा कैराना तथा आसपास के क्षेत्रों में हेपेटाइटिस-सी यानी काला पीलिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दूषित पानी और अन्य कारणों से यह गंभीर रोग तेजी से फैल रहा है, जिससे लोगों में चिंता का माहौल है।
सूत्रों के अनुसार कैराना के कांधला रोड स्थित एक मीट प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी कुओं के माध्यम से जमीन में उतारा जा रहा है। बताया जाता है कि इस अपशिष्ट जल में पशुओं का रक्त और अन्य अवशेष शामिल होते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यही दूषित पानी भूजल में मिलकर पेयजल को प्रदूषित कर रहा है और नगर पालिका द्वारा लगाए गए सबमर्सिबल पंपों के जरिए यही पानी घरों तक पहुंच रहा है। इसके चलते पानी में आर्सेनिक की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि इसी कारण हजारों लोग एचसीवी काला पीलिया जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। मोहल्ला दरबार खुद रेतावाला में पिछले एक दशक के दौरान एक दर्जन से अधिक लोगों की इस बीमारी से मृत्यु होने की बात कही जा रही है।
वर्तमान में जिला अस्पताल में एक हजार से अधिक मरीजों का उपचार चल रहा है, जबकि हर महीने नए मरीजों की पुष्टि हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में हेपेटाइटिस-सी के मरीज अधिक पाए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में अब तक सैकड़ों मरीज पंजीकृत हो चुके हैं, जिनमें लगभग 300 मरीजों का नियमित उपचार जारी है। प्रतिमाह 25 से 30 नए मरीजों में इस रोग की पुष्टि हो रही है।
सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि हेपेटाइटिस-सी प्रायः दूषित पानी पीने, संक्रमित रक्त चढ़ाने तथा असुरक्षित सुई के प्रयोग से फैलता है। बचाव के लिए स्वच्छ पानी का उपयोग, नई सुई का प्रयोग और चिकित्सीय सावधानियों का पालन आवश्यक है। जिला अस्पताल में इस रोग की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है। प्रत्येक शुक्रवार को मरीजों के रक्त नमूने लेकर वायरल लोड की जांच की जाती है और रिपोर्ट के आधार पर उपचार शुरू किया जाता है।
उधर, कृष्णा नदी किनारे बसे गांवों में भी काला पीलिया के मरीज अधिक बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी में फैक्ट्रियों का दूषित पानी छोड़े जाने से बीमारी फैल रही है। उन्होंने प्रशासन से स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराने और जिम्मेदार इकाइयों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
कस्बे के लोगों ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि कांधला रोड स्थित मीट प्लांट को तत्काल शहर से बाहर किसी उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए तथा वर्तमान प्लांट को बंद किया जाए, ताकि नागरिकों को इस घातक प्रदूषण से राहत मिल सके। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि पीलिया के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं और उपचार में लापरवाही न बरतें।

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