कैराना: पवित्र रमज़ान माह के पहले रोज़े के साथ जहां एक ओर मस्जिदों में इबादत और तरावीह की रौनक देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर बाजारों में महंगाई ने रोज़ेदारों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। इफ्तार के लिए जरूरी फल-फ्रूट, खजूर और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम अचानक बढ़ जाने से आम लोगों का बजट बिगड़ता नजर आया।
गुरुवार को वर्ष 2026 के रमज़ान का पहला रोज़ा लोगों ने पूरे जोश और अकीदत के साथ रखा। दिनभर बाजारों में इफ्तार की तैयारियों को लेकर चहल-पहल रही, जबकि रात में मस्जिदों में तरावीह की नमाज़ के दौरान भारी भीड़ उमड़ी और माहौल पूरी तरह इबादतमय हो गया।
इसी बीच बाजारों में फलों के दामों में तेज उछाल दर्ज किया गया। सेब, केला, अंगूर सहित कई फलों की कीमतें लगभग दोगुनी तक पहुंच गईं। इफ्तार में इस्तेमाल होने वाली खजूर और अन्य जरूरी सामान भी ऊंचे दामों पर बिकते नजर आए। वहीं, मांस की कीमतों में बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रमज़ान जैसे पाक महीने में बढ़ती महंगाई और मुनाफाखोरी से खासकर मध्यम और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि यदि कीमतों पर नियंत्रण नहीं हुआ तो पूरे महीने घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा।
नागरिकों ने प्रशासन से बाजार की निगरानी बढ़ाने और जरूरी वस्तुओं के दाम नियंत्रित करने की मांग की है, ताकि रमज़ान के दौरान लोगों को राहत मिल सके और वे सुकून के साथ रोज़ा रख सकें।

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