कैराना।विजय सिंह पथिक कॉलेज में हुआ संगोष्ठी का आयोजन*
विजय सिंह पथिक राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कैराना (शामली) में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर वनस्पति विज्ञान विभागीय परिषद के तत्वावधान में संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसका विषय था "जैवविविधता हानि के कारण व उपचारात्मक उपाय". संगोष्ठी में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा लगभग बीस छात्र-छात्राओं ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. योगेंद्र पाल सिंह, वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार, डॉ. राम कुमार, डॉ. अजय बाबू शर्मा, डॉ. डॉली एवं विभागीय परिषद के सदस्यों कीर्ति, मोशिन, सिया, सागर, सुहेव आदि ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित व पुष्पार्चन कर किया ततपश्चात डॉ. रामकुमार ने संगोष्ठी की थीम रखी तथा प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के नियमों के बारे में बताया तथा सभी का स्वागत किया। प्रतिभागियों ने विषय पर गम्भीरता से अपने विचार रखे तथा जैवविविधता हानि के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए जैवविविधता के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। प्रतिभागियों के विचारों का मूल्यांकन निर्णायक मंडल ने किया जिसके आधार पर बीएससी द्वितीय वर्ष की प्रिया अग्रवाल ने प्रथम, बीएससी तृतीय वर्ष की मानशी ने द्वितीय तथा बीएससी तृतीय वर्ष के सागर धारीवाल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. राकेश कुमार, डॉ. अजय बाबू शर्मा तथा डॉ. डॉली ने निभाई। विभागाध्यक्ष व मीडिया प्रभारी डॉ. राकेश कुमार ने अपने भाषण में जैवविविधता हानि एवं पर्यावरण के असंतुलन का मुख्य कारण मनुष्य की बढ़ती हुई इच्छाओं को बताया तथा संरक्षण के लिए व्यक्तिगत प्रयासों पर बल दिया। डॉ. अजय बाबू शर्मा ने गौरैय्या के उदाहरण द्वारा जैवविविधता हानि की भयावहता को समझाया। डॉ राजेश कुमार अग्रवाल व डॉ डॉली ने आयोजकों की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए विषय की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किये तथा सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्राचार्य ने जैवविविधता हानि के प्रमुख कारणों में प्रदूषण, खनन व संसाधनों के अत्यधिक दोहन को बताया तथा आव्हान किया कि प्रकृति के संरक्षण के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। इस अवसर पर डॉ. भूमेश कुमार, डॉ हंसराज आदि सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम के अंत में सिया ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यक्रम का संचालन कीर्ति उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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