- तीन दिन के अल्टीमेटम के बाद समाप्त कराया गया था व्यापारियों का धरना, राजफाश में लगी विशेष टीमें भी हुई फैल
कैराना। मराठाकालीन बाला सुंदरी मंदिर में चोरी के एक सप्ताह बाद प्राचीन बाबा वनखण्डी महादेव मंदिर में छत्र चोरी व शेषनाग को खंडित करने की वारदात को अंजाम दिया गया था। विरोध में धरना- प्रदर्शन भी हुआ। पुलिस व्यापारियों को आश्वासन देती रही,तीन दिन में राजफाश करने के अल्टीमेटम के बाद धरना समाप्त किया गया, लेकिन 85 दिन बीत गये घटनाओं का राजफाश नहीँ हुआ, जिन तेजतर्रार अधिकारियों की तैनाती महज़ चोरी प्रकरण का खुलासा करने के लिए की गई वो भी ज़ीरो साबित हुए।
गत 22 अगस्त की रात्रि अज्ञात चोरों द्वारा मराठाकालीन बाला सुंदरी देवी मंदिर में धावा बोलकर सोने-चांदी के छत्र व मुकुट चोरी कर लिए गये थे।घटना का राजफाश भी नही हुआ था कि ठीक एक सप्ताह बाद 29 अगस्त को प्राचीन सिद्धपीठ बाबा बनखंडी महादेव मंदिर के कपाट के ताले तोड़कर चांदी का छत्र व शेषनाग को खंडित कर दिया गया था। एक सप्ताह के अंतराल में नगर के दो प्राचीन मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं से नगर के श्रद्धालुओं एवं व्यापारियों में आक्रोश की ज्वाला फूट पड़ी थी। दोनों घटनाओं से आक्रोशित नगर के व्यापारी एवं श्रद्धालु पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए नगर के चौक बाजार में धरने पर बैठ गए थे। राजनीतिक संगठनों के लोग भी धरने में शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडीएम को सौंपकर तीन दिन के अंदर चोरी की दोनों घटनाओं के राजफाश का अल्टीमेटम दिया गया था। परन्तु, अल्टीमेटम की समयावधि पूर्ण होने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली रहे। इस दौरान सीओ बिजेंद्र सिंह भड़ाना व कोतवाल अनिल कपरवान के तबादले कर दिए गए। उनके स्थान पर युवा पीपीएस अधिकारी अमरदीप मौर्य को सर्किल का नया क्षेत्राधिकारी एवं तेजतर्रार निरीक्षक पंकज त्यागी को कोतवाली की कमान सौंपी गई। मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं को लगभग तीन माह होने वाले हैं, लेकिन आज भी पुलिस के हाथ खाली है। राजफाश के लिए लगाई गई पुलिस की आठ टीमें
चोरो को पकड़ने में पूरी तरह नाकाम हो गई है। घटनाओं के जल्द राजफाश के लिए कोतवाली की कमान संभाले हुए इंस्पेक्टर पंकज कुमार त्यागी से भी जनता का विश्वास उठ गया है। मन्दिर चोरी प्रकरण का खुलासा न होने पर कोतवाली पुलिस के खिलाफ फिर से श्रद्धालुओं में आक्रोश पनप हो रहा है। कहीं यह आक्रोश फिर से व्यापरियों को धरने पर बैठने को मजबूर न कर दे।
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सर्विलांस,फोरेंसिक डॉस्क्वॉयड व खुफिया तंत्र भी नाकाम
मन्दिर चोरी प्रकरण को लगभग तीन माह बीतने वाले हैं, लेकिन आज भी राजफाश के कहीं नज़दीक पुलिस टीम दिखाई नहीं दे रही है। सर्विलांस, फोरेंसिक,डॉस्क्वॉयड व खुफिया तंत्र को भी मौके पर बुलाया गया था,मगर रिजल्ट शून्य ही है। आखिर क्यों इतनी टीमें लगाने के बावजूद भी पुलिस मन्दिर चोरी से पर्दा नहीँ उठा सकी है। व्यापारियों व नगरवासियों का विश्वास पुलिस के प्रति टूट रहा है। आस्था पर चोट करने वालों का सुराग न लगा पाना पुलिस की नाकामी को दर्शाता है।
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पंकज त्यागी भी नही कर सके चोरी प्रकरण का खुलासा
लगभग 85 दिन पूर्व एक सप्ताह के अंदर दो प्राचीन मंदिरों में हुई चोरी की घटनाओं के बाद तत्कालीन सीओ बिजेंद्र सिंह भड़ाना व कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अनिल कपरवान को हटा दिया गया था और तेज़तर्रार कोतवाल पंकज त्यागी को कोतवाली कैराना की कमान सौंपी गई थी। कयास लगाए जा रहे थे कि बहुत जल्द मन्दिर चोरी प्रकरण का राजफाश कर दिया जाएगा। कोतवाली की कमान संभाले पंकज त्यागी को काफी समय गुज़र गया है,लेकिन वो भी चोरी प्रकरण का खुलासा करने में नाकाम रहे हैं।
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मन्दिर समिति के प्रबंधक बोले,पुलिस की कार्यशैली ज़ीरो
मन्दिर समिति के प्रबंधक संजय कुमार सिंघल का कहना है कि घटनाओं को लेकर कई बार सीओ व कोतवाल से मिले हैं। उनकी इच्छा केस खोलने की नही है। यहां सब ड्रामा चल रहा है। पुलिस की कार्यशैली ज़ीरो है। हम चाहते हैं कि चोरी का खुलासा हो,माल बरामद हो और गुनहगार जेल जाएं।
संजय कुमार सिंघल
प्रबंधक मंदिर समिति कैराना

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