कैराना। चार दिन पूर्व एडीजे के बन्द मकान के ताले तोड़कर अज्ञात चोरों ने लैपटॉप व एलएडी चोरी प्रकरण में खाकी को महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लग गई है और गुनहगारों के गिरेबान तक खाकी के हाथ पहुंच चुके हैं।जल्द ही पुलिस घटना का राजफाश करेगी।
चार दिन पूर्व एडीजे के बन्द आवास के ताले तोड़कर अज्ञात चोरों ने मकान को खंगालते हुए वहां से लैपटॉप व एलएडी चुरा ली थी और मकान को खुला छोड़ मौके से फरार हो गए थे।लगभग साढ़े बजे सफाई कराने पहुंचे अर्दली चंद्रप्रकाश द्वारा पेशकार को आवास के ताले टूटे होने व सामान चोरी होने की जानकारी दी गई थी,जिसके बाद पुलिस को घटना से अवगत करा दिया गया था।जज के आवास पर चोरी की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया था। अनान -फानन में आला अधिकारियों के साथ डॉगस्कवायड,
फॉरेंसिक व एसओजी टीम ने मौके पर पहुंचकर गहनता से छानबीन की थी। जज के आवास पर हुई चोरी की घटना को कैराना पुलिस ने चैलेंज के तौर पर लिया और बारीकी से हर एंगल को खंगालकर कड़ी से कड़ी जोड़ी गई। सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को खासी मदद मिली। विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सीसीटीवी फुटेज पुलिस के लिए वरदान साबित हुई और चोरी के गुनहगारों के गिरेबान तक खाकी का हाथ पहुंच चुका है और पुलिस के हाथ बड़ी सफलता लग गई है।
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घटना के बाद उठे थे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
पूर्व में हो चुकी चोरी की घटनाओं का राजफाश न होने पर फजीहत झेल रही खाकी पर एडीजे के आवास में चोरी होने के बाद सवाल उठने लगे थे। और चोरी का राजफाश करना कैराना पुलिस के बड़ा चैलेंज बन गया था और इस बार मामला न्यायिक अधिकारी के आवास में चोरी का था,लेकिन पुलिस ने भी घटना गंभीरता से लेते हुए अज्ञात चोरों के चैलेंज को स्वीकार किया और घटना के राजफाश के लिए प्रत्येक बिंदु पर गहनता से जांच शुरू की।जिसमें सूत्रों की माने तो पुलिस को बड़ी कामयाबी मिल गई है और बहुत जल्द घटना का राजफाश भी पुलिस करने जा रही है।
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नेतागिरी का शिकार हुए विद्युत उपभोक्ता
कैराना : नगर में स्थित मोहल्ला दरबारखुर्द की गलियों में बिना विद्युत कनेक्शन के लाइन पहुँचवाने की लगातार शिकायत पर लाइन हटवाई गई थी। लेकिन गलियों में दर्जनों कनेक्शन मौजूद होने के चलते व विरोध होने पर सप्लाई चालू की गई। गलियों के वाशिन्दों को नेताओं की राजनीति के चलते परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मोहल्ला दरबार खुर्द रबझाडी में तीन गलियों की विद्युत विभाग को लगातार की जा रही शिकायत के चलते ऊर्जा विभाग की टीम ने विद्युत लाइन हटवा दी गई थी। लेकिन विद्युत विभाग द्वारा हटाई गई लाइन का गलियों में मौजूद विद्युत उपभोक्ताओं ने जमकर विरोध किया गया। जिसके चलते विद्युत विभाग द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं को लाइट सप्लाई के लिए तार जुड़वाए गए। गली ने बताया कि लाइट के लिए गए तारों को झूठी शिकायत बार बार करने पर हटवाया गया था। यह सब वार्ड के आगमी चुनाव को लेकर गलियों के लोगों को नाजायज परेशान किया गया था। विरोध के चलते कनेक्शन धारकों को सप्लाई दी गई है।
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एमडीए के मानक व नक्शों के बिना कैसे विकसित हो रही अवैध कालोनियां ?
- एमडीए विभाग की उदासीनता या मिलीभगत से होरहा करोड़ों का खेल
- जिला प्रशासन आखिर कब करेगा कार्रवाई
कैराना : अवैध कॉलोनियों में खेल हो रहा है। नगर में गत पांच वर्षों से अवैध कालोनियों की बाढ़ आई हुई है। एमडीए विभाग के बिना नक्शों व मानकों को ताक पर रखकर प्रोपर्टी डीलर अवैध कॉलोनियां काट कर लखपति से करोड़पति रातों रात हो रहे है। कार्रवाई नहीं होने के कारण इस पूरे खेल में एमडीए विभाग के अधिकारियों की पूरी तरह से संलिप्तता की बू आरही है। जिला प्रशासन की ओर से अवैध कार्य पर अंकुश लगाने के कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं कि गई है। बिना मानकों के प्लाटिंग करने वाले डीलरों के हौसले बुलंद हो रहे है।
नगर में स्थित तितरवाड़ा, शामली पानीपत रॉड, कांधला, खुरगान, झाड़खेड़ी, मायापुर, झिंझाना मार्ग व मन्नामाजरा व अफगगान्नान में स्थित बारात घर के समीप पंजीठ गांव के निकट अवैध कॉलोनियों का कार्य तेजी से बढ़ रहा है। प्रोपर्टी डीलर कृषि भूमि व एमडीएम विभाग के निर्धारित मानकों के अनुरूप नक्शे पास कराकर कालोनी काटने के नियमों को ताक पर रख कर पहले से कालोनी काटी जारही है। विभाग का की गाइडलाइंस के अनुरूप एक भी मानक पर खरे नहीं है। डीलर प्लाट काटकर कुछ वर्षों में रातों रात लखपति व करोड़पति बन बैठे है। एमडीए विभाग की उदासीनता कुछ और जगजाहिर कर रही है। आखिर वर्षों से चल रहे खेल का सभी को भलीभांति ज्ञान है। लेकिन मकसद पूरा होने के चलते अनजान बने बठै है अधिकारी। जिला प्रशासन की ओर से भी अवैध कालोनियों पर कार्रवाई करने के लिए सूची तैयार कराई गई है। लेकिन सूची को तैयार होने को भी एक पखवाड़े बीत गया लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।
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ऊपर तक है सेटिंग, नहीं होगी कार्रवाई
नगर के एक डीलर ने कहा कि तमाम डीलरों की विभागों में पूरी सेटिंग है। बिना सेटिंग के भला कोई कार्य वर्षों तक संचालित हो सकता है। नीचे से लेकर ऊपर तक विभागों में तालमेल बनाये हुए है। कार्रवाई का कोई मतलब ही नहीं पैदा होता है।
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प्रशासन की ओर से क्या होगी कार्रवाई ?
एमडीए विभाग वर्षों से जहां चूपी साधे हुए है। वही यह खेल भरपूर मात्रा में जारी है। देखना यह है कि सभी मानकों पूरा नहीं करने वाले कारोबार पर क्या प्रशासन कड़ी कार्रवाई अमल में लाकर इस पर प्रतिबंध लगाएगा।
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