कैराना, 25 अक्टूबर हजरत मखदूम शाह पीर जी इब्राहिम अहमद उस्मानी जलाली साबरी कादरी कलंदरी निजामी भीकी के सालाना उर्स मुबारक के मौके पर एक शानदार बज्म-ए-तजवीदुल कुरआन व नातो-मनकबत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उलमा-ए-किराम, कुर्रा-ए-इजाम, शोरा-ए-किराम और अकीदतमंदों ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर शायर व अदीब रियासत अली ताबिश ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में जमीर अहमद जमीर मालेरकोटला और विशिष्ट अतिथि के तौर पर नगर चेयरमैन शमशाद अंसारी के बेटे मोहम्मद उमर अंसारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन मशहूर निजामतकार कारी अब्दुलवाजिद बटराड़वी ने बखूबी किया।
उर्स मुबारक की तीन दिवसीय तकरीबात 24, 25 और 26 अक्टूबर 2026 को कैराना स्थित दरगाह हजरत इब्राहिम में आयोजित की जा रही हैं। सज्जादानशीन पीरजादा निसार अहमद उस्मानी ने बताया कि उर्स के दौरान कुरआनख्वानी, गिलाफ शरीफ, खत्म-ए-ख्वाजगान, नातो-मनकबत, महफिल-ए-समा और अन्य धार्मिक एवं रूहानी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि संबंधित कार्यक्रम मगरिब की नमाज के बाद होंगे, जबकि महफिल-ए-समा और कव्वाली का आयोजन इशा की नमाज के बाद किया जाएगा।
इस अवसर पर मौलाना मोहम्मद वासिल हुसैनी ने कुरआन करीम की अहमियत और अजमत पर रोशनी डालते हुए कहा कि कुरआन मजीद अल्लाह तआला की आखिरी किताब और पूरी इंसानियत के लिए हिदायत का सरचश्मा है। कुरआन करीम केवल तिलावत की किताब नहीं, बल्कि जिंदगी के हर क्षेत्र में रहनुमाई करने वाला मुकम्मल दस्तूर-ए-हयात है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को कुरआन करीम की तिलावत के साथ उसके मानी और मफहूम को समझने तथा उसकी तालीमात को अपनी जिंदगी में अपनाने की कोशिश करनी चाहिए। कुरआन करीम से मजबूत रिश्ता ही इंसान को वास्तविक कामयाबी और रूहानी सुकून प्रदान करता है।
सज्जादानशीन पीरजादा निसार अहमद उस्मानी ने कुरआन करीम की तालीम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि मौजूदा दौर में नई पीढ़ी को कुरआन मजीद की तालीम से आरास्ता करना वक्त की सबसे अहम जरूरत है। वालिदैन और सरपरस्तों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को कुरआन करीम की सही तिलावत, तजवीद और दीनी तालीमात से परिचित कराएं। उन्होंने कहा कि कुरआन करीम की तालीम इंसान के अखलाक और किरदार को संवारती है तथा समाज में दीनी और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देती है। मदरसों और मकातिब में कुरआन करीम की तालीम को बढ़ावा देने के लिए हर मुमकिन सहयोग किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां दीन से अपना मजबूत रिश्ता कायम रख सकें।
कार्यक्रम के दौरान कारी मोहम्मद साजिद खान, कारी अब्दुल अजीम खान, कारी मोहम्मद शोएब और कारी इस्माइल ने तिलावत-ए-कलाम पाक से महफिल को रूहानी नूर से मुनव्वर किया। उनकी पुरसोज तिलावत ने मौजूद लोगों को रूहानी कैफियत से सरशार कर दिया।
इसके बाद आयोजित नातो-मनकबत की महफिल में रियासत अली ताबिश, जमीर अहमद जमीर, शौकत अली, रवीना खान, वाजिद अली, अजमत कैरानवी, शेर खान साहिल, उमर अंसारी, अब्दुल्लाह अंज़र, उस्मान कैरानवी, डॉ. सलीम फारूकी, साजिद कैरानवी, अजीम कैरानवी और शोएब भूर ने अपने खूबसूरत नातिया और मनकबती कलाम पेश कर श्रोताओं से खूब दाद व तहसीन हासिल की।
महफिल में विशेष रूप से पीर जी अबसार अहमद उस्मानी, बिलाल उस्मानी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति और अकीदतमंद मौजूद रहे। उर्स मुबारक की तकरीबात में शरीक लोगों ने हजरत मखदूम शाह पीर जी इब्राहिम अहमद उस्मानी की दीनी और रूहानी खिदमात को खिराज-ए-अकीदत पेश किया। साथ ही मुल्क व मिल्लत की खुशहाली, अमन-ओ-अमान और उम्मत-ए-मुस्लिमा की सरबुलंदी के लिए दुआएं की गईं।

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