झिंझाना मुशायरे में कैराना के शायरों की अनदेखी पर उठे सवाल, कैराना के शायरों का एक अलग मुकाम है अदब की दुनिया में, आखिर ऐसा क्यों

 

कैराना। 11 जुलाई की रात झिंझाना में आयोजित होने वाले ऑल इंडिया मुशायरे के पोस्टर और आमंत्रित शायरों की सूची को लेकर कैराना के अदबी हलकों में नाराजगी देखी जा रही है। साहित्य प्रेमियों का कहना है कि कैराना और आसपास के उन शायरों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया, जो वर्षों से उर्दू अदब की सेवा कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आयोजन समिति ने स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के बजाय ऐसे नामों को प्राथमिकता दी है, जिनकी अदबी पहचान सीमित है। इससे न केवल स्थानीय शायरों का मनोबल प्रभावित हुआ है, बल्कि मुशायरे की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अदबी जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मामला केवल कुछ शायरों की उपेक्षा का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साहित्यिक परंपरा और उर्दू अदब के सम्मान से जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि स्थानीय रचनाकारों को उचित अवसर मिलना चाहिए।

साहित्य प्रेमियों ने सभी अदबी संस्थाओं, शायरों और उर्दू भाषा से जुड़े लोगों से अपील की है कि भविष्य में ऐसे आयोजनों में स्थानीय प्रतिभाओं को सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए एकजुट होकर सकारात्मक पहल करें, ताकि उर्दू साहित्य की परंपरा और स्थानीय रचनाकारों का सम्मान बना रहे।

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