माहे मुहर्रमुल हराम की आमद के साथ कस्बे एवं आसपास के क्षेत्रों में मजलिस-ए-अज़ा का सिलसिला पूरे अकीदत व एहतराम के साथ जारी है। इमामबाड़ा कलां व खुर्द में प्रतिदिन मजलिसों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें बड़ी संख्या में अज़ादारान-ए-इमाम हुसैन (अ.स.) शिरकत कर रहे हैं। इसी प्रकार अज़ाखाना नवाब रज़ा अली खान और सरदार हुसैन में भी मजलिसों का आयोजन हो रहा है, जहां उलमा-ए-किराम और ज़ाकिरीन वाक़ेआ-ए-कर्बला पर विस्तार से प्रकाश डाल रहे हैं।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना आमिर काज़मी ने कहा कि वाक़ेआ-ए-कर्बला हक़ और बातिल के बीच लड़ी गई एक महान जंग थी। इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफ़ादार साथियों ने दीन-ए-इस्लाम की सरबलंदी तथा इंसानियत की हिफाज़त के लिए बेमिसाल कुर्बानियां पेश कीं। उन्होंने कहा कि मुहर्रमुल हराम सब्र, इस्तेक़ामत और ज़ुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने का पैगाम देता है।
इस अवसर पर ख़तीब-ए-असर शहज़ादा वसी हैदर साक़ी ने अपने संबोधन में कहा कि दो मुहर्रम को इमाम हुसैन (अ.स.) का काफ़िला कर्बला की सरज़मीन पर पहुंचा था, जिसके बाद यज़ीदी लश्कर ने अहले बैत (अ.स.) पर पाबंदियां और सख्तियां लागू करना शुरू कर दी थीं। उन्होंने कहा कि शोहदा-ए-कर्बला की अज़ीम और अमर कुर्बानियां क़यामत तक हक़ और सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों के लिए मशाल-ए-राह बनी रहेंगी।
मजलिसों में काज़िम हुसैन, शारिब हुसैन, ज़ामिन हुसैन, शबाब हैदर, जमाल हैदर, अली अब्बास, शान हैदर शानू, अली मेहदी, सरवर हुसैन, सईदुल हसनैन, गुलज़ार अली, शराफ़त हुसैन, मुमताज़ अली, इंतज़ार हुसैन, मोहम्मद आलम, गुलाम हुसैन, अरबाब हैदर, शुजाअत हुसैन, अली गौहर, बाक़िर रज़ा, जर्रार हुसैन, मोहम्मद मोहसिन, दानियाल काज़मी, रोशन अली तथा नातिक अब्बास आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
मजलिसों के समापन पर शोहदा-ए-कर्बला को ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया गया तथा उम्मत-ए-मुस्लिमा की एकता, अमन-ओ-अमान और देश की तरक्की के लिए विशेष दुआएं की गईं।

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