कैराना: 21 वी शताब्दी में हर वर्ग के लोग एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर अपने आपको चमकाने में जुटे हैं। वहीं उज्वल भविष्य के लिए सकारात्मक प्रतिस्पर्धा अति महत्वपूर्ण है। लेकिन बेटियों की शादियों में अधिक खर्च होने एवं महंगाई चरम सीमा पर पहुंचने के कारण सभी वर्ग एवं समुदाय के लोग धीरे धीरे अनावश्यक खर्च एवं बेटियों की शादी देहज रहित करने में जुट गए हैं। दुल्हन ही देहज हैं, वाले संदेश को बढ़ावा देने व स्वीकार करने में जुट गए हैं।
गत गुरुवार को तहसील क्षेत्र के गांव डुंडूखेड़ा में गुर्जर समाज के दो परिवारों के बीच एक सादगीपूर्ण और प्रेरणादायक विवाह समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रदीप कुमार की पुत्री तथा राज बहादुर सिंह की भतीजी आयुष्मती चारू का विवाह चिरंजीवी अंशुल बोस, पुत्र विजय बोस के साथ विधिवत सम्पन्न हुआ। लड़के के पिता विजय बोस वर्तमान में चंडीगढ़ निवासी हैं तथा मूल रूप से गांव गढ़ी, निवादा (सोनीपत) के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने पुत्र के विवाह में बिना कोई नकदी व सामान लिए मात्र 1 रुपया शगुन के रूप में स्वीकार कर समाज के सामने एक अत्यंत सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। आधुनिक युग बढ़ती महंगाई के समय में जब विवाह समारोहों में दहेज और अनावश्यक खर्च का चलन बढ़ता जा रहा है, ऐसे में उनका यह कदम समाज में सादगी, समानता और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। यह पहल दहेज प्रथा के खिलाफ एक प्रेरणादायक कदम है, जो निश्चित रूप से समाज को एक नई दिशा देने का कार्य करेगा। समाज में सकारात्मक बदलाव एवं गरीब माता पिताओं को बेटियों की शादी निर्भीकता से करने में साहस पैदा करेगा।
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