कैराना/प्रयागराज। दहेज हत्या से जुड़े चर्चित प्रकरण “कलमुन निशा बनाम उत्तर प्र देश राज्य” में कैराना की बेटी अधिवक्ता शबिस्ता परवीन ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में प्रभावशाली पैरवी करते हुए अपनी मजबूत कानूनी क्षमता का परिचय दिया। न्यायालय ने सुनवाई के बाद आरोपी सास को जमानत प्रदान कर दी।
यह मामला जनपद महाराजगंज के निचलौल थाने में दर्ज अपराध संख्या 207/2025 से संबंधित है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 304B (दहेज हत्या), 498A (क्रूरता), 323 (चोट) एवं 506 (धमकी) तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
केस संख्या क्रिमिनल मिसलेनियस बेल एप्लिकेशन पर सुनवाई करते हुए जस्टिस समीर जैन की पीठ ने यह आदेश पारित किया।
बचाव पक्ष की दलीलें
आवेदिका की ओर से अधिवक्ता शबिस्ता परवीन ने न्यायालय के समक्ष मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि:
एफआईआर दर्ज कराने में दो वर्ष से अधिक की देरी हुई है
आवेदिका (सास) के खिलाफ कोई स्पष्ट एवं विशिष्ट आरोप नहीं हैं
सामान्य आरोपों के आधार पर पूरे परिवार को फंसाया गया है
न्यायालय ने प्रस्तुत तथ्यों पर विचार करते हुए पाया कि:
आरोपों में स्पष्टता का अभाव है
एफआईआर में देरी महत्वपूर्ण पहलू है
मेडिकल (विसरा) रिपोर्ट के आधार पर आत्महत्या की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता
इन आधारों पर न्यायालय ने आरोपी सास को व्यक्तिगत बांड एवं दो जमानतदारों पर रिहा करने का आदेश दिया, साथ ही ट्रायल के दौरान साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने जैसी शर्तें भी लगाई गईं।
कैराना के लिए गर्व का विषय
इस मामले में अधिवक्ता शबिस्ता परवीन की सशक्त पैरवी ने यह साबित किया कि छोटे शहरों की बेटियां भी बड़े न्यायालयों में अपनी पहचान बना रही हैं। उनकी कानूनी समझ और प्रभावशाली तर्कशक्ति क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन रही है।
कैराना की बेटी” शबिस्ता परवीन आज न्याय के मंच पर एक मजबूत आवाज बनकर उभर रही हैं।

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